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| चम्पा का आयुर्वेदिक दवा के रूप में उपयोग |
चम्पा के पेड़ बगीचों में लगाये जाते हैं। इसके पत्ते लम्बे-लम्बे महुआ के पत्तों की भांति पीले रंग के तथा कोमल होते हैं। इसके फूल पीले 4-5 पंखुड़ियों सहित 5-7 केसरों से युक्त होते हैं। मालवा देश में इसकी उत्पत्ति अधिक होती है। इसका पेड़ विशाल होता है।
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चम्पा के पेड़ पीले रंग के होते हैं।इसका स्वाद तीखा होता है।
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चम्पा के पत्ते राम फल के पत्तों के समान होते हैं। इसका फूल बहुत ही पीला और सुगन्धित होता है। यह कुछ गर्म और शीतल होता है।यह ठण्डी प्रकृति की होती है।
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चम्पा भूख को रोकती है।चम्पा वीर्य को बढ़ाने वाली,हृदय के लिए लाभकारी, सुगन्धित भौंरों को नष्ट करने वाली,जलन,पित्त और खून की खराबी को नष्ट करती है। इसको सूंघने से दिल और दिमाग शक्तिशाली बनता है।
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चम्पा की जड़ की फांट को 40 से 80 मिलीलीटर तक की मात्रा में रोगी को देने से पुनरावर्तक ज्वर में लाभ होता है।
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चम्पा के फूलों का काढ़ा बनाकर पीने से आमाशय का घाव एवं दर्द ठीक हो जाता है।
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चम्पा की जड़ का काढ़ा बनाकर पीने से दस्त आकर कब्ज की शिकायत मिट जाती है।
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चम्पा की जड़ का चूर्ण 600 मिलीग्राम से 1.80 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम देने से आर्तव (माहवारी) जारी हो जाती है।
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10 मिलीलीटरचम्पा के फूलों के रस को शहद के साथ पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
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चम्पा के 20 मिलीलीटर ताजे पत्तों के रस को पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं और पेट के दर्द में लाभ होता है।
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10 मिलीलीटर चम्पा के पत्तों का रस लेकर 20 ग्राम शहद के साथ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
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चम्पा के पत्तों को पीसकर शहद में मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है।
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गठिया के रोगी को चम्पा के फूलों से बने हुए तेल से मालिश करने से लाभ मिलता है।
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चम्पा की जड़ की छाल को दही में पीसकर फोड़ों पर लगाने से उनकी सूजन ठीक हो जाती है।
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हाथ-पैरों पर चम्पा के फूलों का तेल बनाकर मालिश करने से ऐंठन वाला दर्द ठीक हो जाता है।
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3 ग्राम चम्पा की छाल के चूर्ण को दिन में 2 बार पानी के साथ खाने से दूषित रक्त (खून की खराबी) साफ हो जाता है।
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पैर के दाद पर चम्पा के फूलों को पीसकर लगाने से लाभ होता है।
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शरीर की शक्ति को बढ़ाने के लिए चम्पा के फूलों का चूर्ण बनाकर इस चूर्ण में शहद मिलाकर खाने से शरीर शक्तिशाली बन जाता है।
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